Monday, January 30, 2023
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नैनीताल:न्याय के लिए यहाँ पुलिस नहीं केवल हाईकोर्ट है! मनोज गोस्वामी प्रकरण का हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान,मनोज समेत परिवार को दी सुरक्षा

नैनीताल ::- कई महीनों से पुलिस और उत्तराखंड सरकार के चक्कर काटता हुआ मनोज गोस्वामी अंत में हाईकोर्ट की शरण में जा पहुंचा जहां हाईकोर्ट के द्वारा मनोज गोस्वामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए मनोज गोस्वामी और उसके परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए सरकार और नैनीताल पुलिस को निर्देशित किया है । अवैध खनन को रोकने के लिए आवाज उठाने पर मनोज गोस्वामी खनन माफिया के साथ साथ नैनीताल पुलिस का भी दुश्मन बन बैठा अक्सर जब भी किसी व्यक्ति के साथ अन्याय होता है तो वह पुलिस की शरण में जाता है ताकि पुलिस उसकी रक्षा कर सके क्योंकि स्थानीय स्तर पर कानून व्यवस्था और जनता की रक्षा करने का दायित्व पुलिस का होता है लेकिन मनोज गोस्वामी प्रकरण में एक थानेदार से लेकर एसएसपी तक निष्पक्ष जांच नहीं कर पाये कहीं न कहीं माफियाओं का या फिर राजनैतिक दबाव जिले में पुलिस पर देखा जा सकता है । मनोज गोस्वामी जो लगातार पुलिस से सुरक्षा की मांग के साथ हिश्ट्रीशीटर के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग कर रहा था लेकिन पुलिस के द्वारा केवल लीपापोती होती रही और जब मनोज पर हमला हो गया हिश्ट्रीशीटर को हमले से मात्र कुछ घंटे पहले जिला बदर दिखा दिया मुकदमा दर्ज़ करने के बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ी और पुलिस की मिलीभगत का इससे बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता इसी प्रकरण में जब मनोज गोस्वामी हाई कोर्ट के अधिवक्ता के पास नैनीताल होता है तो पुलिस मारपीट का करने का मुकदमा मनोज गोस्वामी पर कर देती है और मनोज गोस्वामी को हल्द्वानी दिखा देती है और कहती है जांच के बाद पता चलेगा कि मनोज गोस्वामी हल्द्वानी में था या नहीं लेकिन यही मित्र पुलिस मनोज गोस्वामी के द्वारा दर्ज़ करवाए मुकदमों की न तो जांच करती है और न ही सुरक्षा के लिए कोई कार्यवाही करती है ।इसलिए मनोज गोस्वामी हाईकोर्ट की शरण में जा पहुंचे जहां हाई कोर्ट पुलिस और राज्य सरकार को निर्देश जारी करता है । हाईकोर्ट ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिवादी, थाना प्रभारी काठगोदाम कर्तव्यों के निर्वहन नहीं कर रहे है जबकि राज्य और उसके अधिकारियों का दायित्व है कि वे बड़े पैमाने पर ऐसे लोगों को सुरक्षा प्रदान करें जिन्हे खुलेआम जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हो ।
हाईकोर्ट ने 16 अगस्त 2022 को उत्तराखंड सरकार एसएसपी नैनीताल और विशेष रूप से पुलिस स्टेशन प्रभारी हल्द्वानी को मनोज गोस्वामी और उसके परिवार के लिए सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश जारी कर दिये है और ये भी कहा है कि किसी भी तरह की कोई हानि मनोज गोस्वामी और उसके परिवार को न होने पाये ।
हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश देते हुए कहा है कि हृदयेश कुमार के खिलाफ पुलिस और स्थानीय प्रशासन के द्वारा जो भी आदेश जारी किए गए या जो भी मुकदमा पंजीकृत किया गया है उस पर कढ़ाई से पालन किया जाये और अगर ऐसा नहीं होता तो इसके लिए पुलिस स्टेशन हल्द्वानी के इंचार्ज को दोषी माना जाएगा ।अगली सुनवाई के लिए हाई कोर्ट ने 29 सितंबर 2022 की तारीख दी है ।
उत्तराखंड में लगातार पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे है खासकर नैनीताल और उधम सिंह नगर जिलों में जनता पुलिस से काफी नाराज है और लगातार ऐसे प्रकरण सामने आ रहे है जहां पुलिस दोषियों के साथ खड़ी नजर आती है । इस मामले में मनोज गोस्वामी के अनुसार हिश्ट्रीशीटर हृदयेश कुमार को बचाने के पीछे कुछ बीजेपी और कॉंग्रेस के मिले जुले नेताओं का हाथ है मनोज गोस्वामी ने आरोप लगाया है कि हल्द्वानी के डमुवाढूंगा क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन की काली कमाई स्थानीय नेताओं और पुलिस को भी जाती है जिस वजह से स्थानीय नेता और पुलिस खनन माफ़ियों पर कार्यवाही करने की बजाय उन्हें बचाने के जुगाड़ में रहती है ।

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