Tuesday, February 7, 2023
No menu items!
Google search engine
Homeउत्तराखंडअल्मोड़ा : शेयर्ड हिस्ट्री एंड कल्चर विषय पर तीन दिवसीय अंतराष्ट्रीय सेमिनार...

अल्मोड़ा : शेयर्ड हिस्ट्री एंड कल्चर विषय पर तीन दिवसीय अंतराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

अल्मोड़ा ::- एसएसजे विश्वविद्यालय और सेवा इंटरनेशनल-अंतराष्ट्रीय सहयोग परिषद (नेपाल अध्ययन केंद्र) नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में ‘इंडो नेपाल रिलेशन्स एंड उत्तराखंड इंडिया।

शेयर्ड हिस्ट्री एंड कल्चर’ विषयक तीन दिवसीय अंतराष्ट्रीय सेमिनार का मुख्य अतिथि रूप में डॉ. मुरली मनोहर जोशी (महान शिक्षाविद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री, भारत सरकार) संदर्भ/मुख्य वक्ता व्याख्यान सुनील आम्बेकर (अखिल प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय सेवक संघ) विशिष्ट अतिथि डॉ. धन सिंह रावत (शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सहकारिता मंत्री, भारत सरकार) कार्यक्रम अध्यक्ष अजय टम्टा (सांसद अल्मोड़ा, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री, भारत सरकार) एवं एसएसजे विश्वविद्यालय के प्रो. नरेंद्र सिंह भंडारी कुलपति, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, राजेन्द्र रावल वरिष्ठ उपाध्यक्ष, महाकाली साहित्य संगम,नेपाल, स्थानीय आयोजक सचिव प्रो.वीडी एस नेगी आदि ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।


कार्यक्रम का उद्घाटन संगीत विभाग की छात्राओं ने वंदना एवं स्वागत गीत गया । आयोजक सदस्यों ने अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।

इंडो नेपाल रिलेशन्स एंड उत्तराखंड इंडिया शेयर्ड हिस्ट्री एंड कल्चर’ विषयक तीन दिवसीय अंतराष्ट्रीय सेमिनार के अवसर पर मुख्य अतिथि रूप में डॉ मुरली मनोहर जोशी (महान शिक्षाविद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री, भारत सरकार) ने वर्चुअल रूप से जुड़कर सेमिनार को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल की साझा संस्कृति का इतिहास सदियों पुराना है। विश्वविद्यालय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद नेपाल अध्ययन केंद्र, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सेमिनार में भारत-नेपाल की संस्कृति, समाज, इतिहास, पुरातत्त्व, परंपराओं पर चिंतन होगा। उन्होंने ऐतिहासिक पक्षों को उजागर करते हुए आयोजकों को अपनी ओर से बधाइयाँ दी।

सुनील आम्बेकर अखिल प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय सेवक संघ ने कहा की भारत और नेपाल के बीच बहुत पुराने संबंध हैं। उन्होंने भारत-नेपाल के ऐतिहासिक संबंधों पर विस्तार से बात रखी। भारत और नेपाल के बीच समानताओं को खोजना और प्रकाश में लाना होगा। संरचनात्मक पक्षों पर काम करना होगा, अनुसंधान करना होगा दोनों देशों के बीच रिश्ते गहरे हो सकें। संबंधों को नवीन ऊंचाइयों पर ले जाना होगा।

सम्बंधित खबरें
- Advertisment -spot_imgspot_img

ताजा खबरें