Monday, January 30, 2023
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अल्मोड़ा : एसएसजे परिसर में योग साधना पद्धतियों का आधात्मिक-वैज्ञानिक आधार एवं चिकित्सकीय महत्व विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

अल्मोड़ा ::- योग विज्ञान विभाग एसएसजे परिसर में ‘योग साधना पद्धतियों का आधात्मिक-वैज्ञानिक आधार एवं चिकित्सकीय महत्व विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. नरेंद्र सिंह भंडारी,कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. जगत सिंह बिष्ट निदेशक, शोध एवं प्रसार, विशिष्ट अतिथि डॉ.महेंद्र मेहरा मधु, अतिथि ललित लटवाल अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक, डॉ. मुकेश सामन्त कुलानुशासक और कार्यक्रम संयोजक डॉ.नवीन भट्ट विभागाध्यक्ष ने संयुक्त रूप से राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो.जगत सिंह बिष्ट निदेशक, शोध एवं प्रसार योग में आसन, यम, नियम, धारणा, आहार, प्राणायाम आदि के सहारे हम अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं। योग का अर्थ है जोड़ना उन्होंने कहा कि योग हमारी चित्त प्रवृत्तियों को नियंत्रित करता है। पौराणिक काल से आज तक योग ज्ञान और अनुशासन का शास्त्र है। वैदिक काल में योग आध्यात्मिक ज्ञान देता रहा है। आज योग के माध्यम से हम अपने जीवन को सही दिशा में लगा सकते हैं। मन में हो रही हलचलों को हम योग साधना से नियंत्रित कर सकते हैं। योग का अभ्यास करें। योग के माध्यम से इस विश्वविद्यालय कक नाम रोशन करें। उन्होंने डॉ नवीन भट्ट के कार्यों को सराहा।

विशिष्ट अतिथि रूप में अपने उद्बोधन में डॉ.महेंद्र मेहरा मधु ने कहा कि योग का वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक आधार श्रीमदभगवद गीता है। इसमें यम नियम, आसान, ध्यान, धारणा, समाधि सभी कुछ है। उन्होंने योग के सभी पहलुओं पर विस्तार से व्याख्यान दिया।उन्होंने कहा कि योग हमारे स्वास्थ्य को सबल बनाता है और हमें सुख प्रदान करता है। योग हमें मानव बनाता है। हमें योग साधना कर योग के महात्म्य को आगे ले जाने के लिए कार्य करना चाहिए।

ललित लटवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन भट्ट के निर्देशन में उनके समस्त सहयोगी का काम सराहनीय रहा है। आज युवाओं में नशे की प्रवृति बढ़ रही है। हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि हम गलत मार्ग से युवा को रोकें। योग के द्वारा हम इस भयावह होते हुए नशे से समाज को मुक्त कर सकते हैं। उन्होंने सभी को शुभकामना दी।

प्रो.नरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद एवं अल्बर्ट आइंस्टीन मेरे प्रेरक हैं। उन्होंने आगे कहा कि पहचान कर्म करने से होती है। हमारी पहचान योग-साधना है। मौन और ध्यान का हम प्राचीन शास्त्र में अध्ययन करते हैं। आज वैश्विक पटल पर योग चर्चा होने से भारत की पहचान बन रही है। पंचकर्म चिकित्सा, प्राण चिकित्सा, मर्म चिकित्सा, प्रकृतिक चिकित्सा आदि को संचालित कर हम अपनी आर्थिकी को मजबूत कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जब कोटा में रसायन उद्योग बन सकता है तो यहां योग भी एक उद्योग बन सकता है। आप सभी योग साधक हमारी प्राचीन पद्धति रूप में योग को रोजगार से जोड़ सकते हैं। कुलपति प्रो.भंडारी ने कहा कि हमारे पास अवसर और चुनौतियां हैं। हम नवाचार करें। योग साक्षरता अभियान इस विश्वविद्यालय की देश का अनूठा अभियान है। कोरोना काल में हमारे विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों ने समाज के लिए बेहतर कार्य किये हैं। यह योग विभाग के द्वारा ग्रामों में संचालित है। योग को लेकर हम बहुत बड़े स्तर पर कार्य कर रहे हैं। श्री भगवद्गीता के संबंध में कुलपति ने आगे कहा कि वह विश्व का सबसे बड़ा जीवित ग्रंथ है। उसमें योग, कर्म आदि सभी कुछ है जो मानव को निर्देशित करती है। उन्होंने योग विज्ञान विभाग के कार्यों की सराहना की।

कार्यक्रम संयोजक डॉ नवीन भट्ट (विभागाध्यक्ष) ने कहा कि इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा योग के विभिन्न आयामों को लेकर विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। यौगिक साधना पद्धतियों का आध्यात्मिक-वैज्ञानिक आधार और चिकित्सकीय महत्व पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि योग विज्ञान विभाग कई कार्यक्रमों का संचालन कर समाज को जागरूक कर रहा है। उन्होंने सभी अतिथियों का आभार जताया। वैकल्पिक चिकित्सा केंद्र, सामुदायिक योग चिकित्सा केंद्र के माध्यम से हम काम करेंगे।

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