Monday, January 30, 2023
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अल्मोड़ा : हरेला पीठ द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के तहत व यू-सर्क के सहयोग से हरेला महोत्सव का वनस्पति विज्ञान विभाग में हुआ समापन,निकाली पर्यावरण जागरूक्ता रैली

अल्मोड़ा ::- एसएसजे विश्वविद्यालय अल्मोडा के हरेला पीठ द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के तहत और यू-सर्क के सहयोग से वनस्पति विज्ञान विभाग में समापन हुआ। कुलपति प्रो नरेंद्र सिंह भंडारी ने हरेला पीठ की स्थापना की है। यह पीठ लोक संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण आदि के लिए कार्य कर रही है। यह पीठ प्रत्येक वर्ष हरेला पर्व के अवसर पर साप्ताहिक कार्यक्रम आयोजित करती है। आज हरेला पीठ द्वारा वनस्पति विज्ञान विभाग में ‘हरेला महोत्सव’ का समापन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो प्रवीण सिंह बिष्ट, विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो शेखर चन्द्र जोशी अधिष्ठाता शैक्षिक, कार्यक्रम अध्यक्ष एवं हरेला पीठ के निदेशक प्रो.जगत सिंह बिष्ट, सह संयोजक हरेला पीठ डॉ. बलवंत कुमार ने अतिथि रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। हरेला पीठ ने अतिथियों को पुष्प देकर एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।

हरेला पीठ के सह संयोजक डॉ बलवंत कुमार ने हरेला महोत्सव के कार्यक्रमों की विस्तार से रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थापित हरेला पीठ द्वारा आयोजित हुए हरेला महोत्सव के दौरान विविध प्रकार की गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। हरेला महोत्सव के दौरान आयोजित किये गए पौधारोपण, जनजागरूकता अभियान, मेहंदी प्रतियोगिता, ऑनलाइन हरेला जागरूकता अभियान, रैली आदि विविध कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि 500 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

प्रो. शेखर चंद्र जोशी ने कहा प्रकृति सबसे बड़ी है। प्रकृति के विरुद्ध कोई व्यवहार नहीं रखना है,जिससे प्रकृति रूष्ट हो। हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए हरेला महोत्सव जैसे कार्यक्रमों की आवश्यकता है।उन्होंने हरेला पीठ के द्वारा आयोजित सभी कार्यक्रमों की सराहना की। साथ ही उन्होंने न्यू एजुकेशन पालिसी पर विस्तार से उद्बोधन दिया।

मुख्य अतिथि रूप में प्रो प्रवीण सिंह बिष्ट ने कहा कि हरेला प्रकृति से जुड़ने का पर्व है। हरेला महोत्सव पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे रहा है। हमें पर्यावरण बचाने के लिए आगे आना होगा। धरा है तो हम हैं। इस प्रकृति का हमें ध्यान रखना होगा। प्रकृति से वातावरण शुद्ध होता है और वहः मानव जीवन को बचायर रखने के लिए हमें बहुत कुछ प्रदान करती है। हमें हरेला पर्व की महत्ता को जानना है। उन्होंने हरेला पीठ के निदेशक एवं हरेला पीठ के कार्यों की सराहना की।



प्रो जगत सिंह बिष्ट ने वृक्षों की महत्ता को बताते हुए उन्होंने कहा कि एक वृक्ष सौ पुत्रों के समान है। हमें वृक्षारोपण करना चाहिए। हरेला पीठ के संबंध में प्रो बिष्ट ने कहा विश्वविद्यालय में स्थापित हरेला पीठ लोक संस्कृति, परंपरागत ज्ञान के संकलन, पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है। प्रो बिष्ट ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो नरेंद्र सिंह भंडारी, हरेला महोत्सव के दौरान आयोजित हुए सभी कार्यक्रमों के संयोजकों, आयोजकों, शिक्षकों विद्यार्थियों,शिक्षणेत्तर कर्मियों, हरेला पीठ के सभी सदस्यों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी यह हरेला पीठ कार्यक्रम आयोजित करेगी।


कार्यक्रम में हरेला महोत्सव के दौरान आयोजित हुई पोस्टर एवं कला प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।

इससे पूर्व हरेला पीठ द्वारा पर्यावरण जागरूक्ता रैली वनस्पति विज्ञान विभाग से शिखर तिराहे तक निकाली गई। पर्यावरण को बचाने से संबंधित जागरूकता रैली को हरेला पीठ के निदेशक प्रो जगत सिंह बिष्ट, वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं हरेला पीठ के सह संयोजक डॉ बलवंत कुमार, वरिष्ठ शिक्षक डॉ. धनी आर्य, राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. डी. एस. धामी ने रैली का उद्घाटन किया। वनस्पति विज्ञान विभाग के विद्यार्थी, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवी, एनसीसी 77 और 24 बटालियन के कैडेट्स सहित परिसर के शिक्षक, छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

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